सीएम धामी का बड़ा कदम, मेडिकल कॉलेजों में “142 असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त” स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की घोषणा

मुख्यमंत्री धामी ने चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से चयनित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 142 असिस्टेंट प्रोफेसर्स को नियुक्ति पत्र वितरितकिए। उन्होंने नव नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये अवसर चिकित्सा के क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्णकदम सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि सभी अपने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ उनकेभीतर संवेदनशीलता, सहानुभूति और सेवा की भावना भी विकसित करें। जिससे वे कुशल और दक्ष चिकित्सक बनने के साथ समाज के प्रति अपनेकर्तव्यों और मानवता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भी पूरी ईमानदारी से निभाएं। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्यसरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर निरंतर कार्य कर रही है। राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीयसुविधाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। आयुष्मान योजना के अंतर्गत अब तक करीब 61 लाख आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए हैं।जिसके माध्यम से प्रदेश के लगभग 17 लाख से अधिक मरीजों का 3300 करोड़ रुपये से अधिक का कैशलेस उपचार किया गया है। टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराजमुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित कर रही है। जिससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को उनके जिले में हीआधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इनमें से पाँच मेडिकल कॉलेज पहले से ही संचालित किए जा चुके हैं, जबकि दो और मेडिकलकॉलेजों का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग भी स्थापित किए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा हल्द्वानी में राज्य के प्रथम आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। साथ ही हेली एंबुलेंस, आपातकालीनपरिस्थितियों में सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है। राज्य में मरीजों को पैथोलॉजिकल जांचों की भी निःशुल्क सुविधाप्रदान की जा रही है। टेलीमेडिसिन सेवाओं के माध्यम से दूरदराज के गाँवों में विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा परामर्श सुविधा भी प्रदान किया जा रहा है। लगभग 27 हजार युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुएमुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की कमी को दूर किया जा रहा है। 142 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियुक्तिपत्र प्रदान कर रहे हैं, साथ ही 356 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी गतिमान है। 1248 नर्सिंग अधिकारियों और 170 टैक्नीशियनों कोभी नियुक्तियां प्रदान की गई है और करीब 600 नर्सिंग अधिकारियों की चयन प्रक्रिया भी गतिमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहले भर्तियों मेंभारी पक्षपात, धांधली और भ्रष्टाचार हुआ करता था। हमने, राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। आज सभी चयन प्रक्रियाएँमेरिट के आधार पर सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनके कौशल और परिश्रम का पूरा लाभ मिल रहा है। अब तक प्रदेश केलगभग 27 हजार युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा जहां भी पद रिक्त हैं, उन्हें जल्द से जल्द आयोग के माध्यम से भराजायेगा।
पंजाब में किसानों का गुस्सा फूटा संगरूर में ‘स्मार्ट मीटर उखाड़ो’ अभियान शुरू, बुधवार को पावरकॉम दफ्तर में मीटर लौटाए जाएंगे

पंजाब के किसानों ने बिजली विभाग की ‘स्मार्ट मीटर’ लगाने की मुहिम के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। मुख्यमंत्री भगवंतमान के गृह जिले संगरूर में किसान मजदूर मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (एकता आजाद) ने मंगलवार को स्मार्ट मीटर उखाड़ो अभियानशुरू कर दिया। यूनियन ने सीधे चुनौती देते लोगों को भरोसा दे डाला कि किसी तरह की कारवाई को यूनियन संभालेगी। आक्रोशित किसानों ने घरों सेस्मार्ट मीटर उतारे और उन्हें बोरों (थैलों) में भरकर इकट्ठा किया। किसानों ने विभाग को खुली चुनौती देते हुए एलान किया है कि बुधवार को ये सभीमीटर पावरकॉम के संबंधित कार्यालयों में जमा करवाए जाएंगे और विभाग से तुरंत साधारण मीटर लगाने की मांग की जाएगी। किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दियाविरोध प्रदर्शन की यह लहर मुख्यमंत्री के गृह जिले संगरूर के कई गांवों में फैल गई है। छाजली इलाके में ही उपभोक्ताओं की सहमति से करीब एकसौ स्मार्ट मीटर उतारे गए। किसान नेताओं की अगुवाई में यह मुहिम तोलावाल, चीमा, शाहपुर, बिगड़वाल, बडरूखां आदि गांवों में चली। किसाननेताओं जसवीर सिंह, संतराम, दर्शन सिंह, बलविंदर सिंह और हरबंस सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हम लगातार स्मार्ट मीटर नलगाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग ने एक न सुनी। इन प्रीपेड मीटरों में निजी कंपनियों की चिप लगी है, यह पावरकॉम का निजीकरण करने कीखुली कोशिश है। किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आर्थिक तंगी के कारण कई बार उपभोक्ता समय पर बिल नहीं भर पाते। प्रीपेड मीटरिंगसिस्टम लागू होने से पैसा खत्म होते ही बिजली तुरंत कट जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति (बीमारी, रात का समय) में आम आदमी कीमुश्किलें कई गुना बढ़ जाएंगी। किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक विभाग साधारण मीटर नहीं लगाता, उनका यह विरोध अभियान जारीरहेगा। बुधवार को पावरकॉम दफ्तरों में ‘मीटर जमा’ करवाए जाएंगे।
यूक्रेन के ज़ेलेंस्की का कड़ा रुख: ‘रूस को एक इंच भी जमीन नहीं देंगे’, यूरोप में समर्थन जुटाने का दौर जारी

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने साफ कहा है कि वह रूस को अपनी जमीन का एक इंच भी नहीं सौंपेंगे। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दियाहै जब वह यूरोप का लगातार दौरा कर समर्थन जुटा रहे हैं और दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप लगातार दबाव बना रहे हैं कि यूक्रेन रूस सेसमझौता करे। जेलेंस्की मंगलवार को रोम पहुंचे, जहां उन्होंने पोप लियो 14 से मुलाकात की और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से बात करने वाले हैं।इससे पहले सोमवार को वह लंदन गए, जहां ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सेमिले। उनका मकसद साफ है यूरोप का मजबूत समर्थन कायम रखना क्योंकि अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध पर एक कठिन समझौते का दबाव बढ़ा रहा है। क्योंकि कुछ एंटी-यूक्रेनी बिंदु हटा दिए गएअमेरिका और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच तीन दिन की बातचीत खत्म हुई, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। मुख्य विवाद यह है किअमेरिकी योजना में डोनबास क्षेत्र का एक हिस्सा रूस को देने का सुझाव है। रूस इस क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर चुका है, लेकिन यूक्रेन और उसकेयूरोपीय साथी किसी भी तरह की जमीन सौंपने के खिलाफ हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि ज़ेलेंस्की ने अभी तक प्रस्ताव “ध्यान से पढ़ा नहीं”, जबकिट्रंप लंबे समय से कह रहे हैं कि यह युद्ध अमेरिकी टैक्स के पैसे की बर्बादी है। जेलेंस्की ने सोमवार रात पत्रकारों से कहा कि “हम कुछ भी देना नहींचाहते। रूस लगातार दबाव डाल रहा है कि हम जमीन छोड़ दें, लेकिन कानूनन और नैतिक रूप से हमारे पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।उन्होंने कहा कि अमेरिकी शांति योजना में पहले 28 बिंदु थे, लेकिन अब यह 20 रह गए हैं क्योंकि कुछ एंटी-यूक्रेनी बिंदु हटा दिए गए हैं। इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और नौ लोग घायल हुएब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने ज़ेलेंस्की का खुलकर साथ दिया है। स्टार्मर ने कहा कि यह शांति प्रयासों का “निर्णायक समय” है और किसी भी समझौते में“न्यायपूर्ण और टिकाऊ संघर्षविराम” जरूरी है। जर्मन चांसलर मर्ज ने अमेरिकी दस्तावेजों पर संदेह जताते हुए कहा कि कई बिंदुओं पर चर्चा जरूरी है।यूरोपीय देश जोर दे रहे हैं कि किसी भी समझौते के साथ मजबूत सुरक्षा गारंटी हों ताकि रूस भविष्य में हमला न कर सके। दोनों देशों के बीच बीतीरात ड्रोन हमलों का बड़ा आदान-प्रदान हुआ। यूक्रेन ने कहा कि रूस ने 110 ड्रोन दागे, जिनमें से 84 को मार गिराया गया, जबकि 24 अपने लक्ष्य तकपहुंचे। हमलों की वजह से कई क्षेत्रों में इमरजेंसी ब्लैकआउट लगाया गया। वहीं रूस ने दावा किया कि उसने 121 यूक्रेनी ड्रोन नष्ट किए। रूस केचुवाशिया क्षेत्र में हमले में इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और नौ लोग घायल हुए।
वंदे मातरम के 150 साल, संसद में पीएम मोदी ने सौगत रॉय से पूछा ‘दादा, तबीयत कैसी?’

संसद में आज वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के मौके पर भारत के राष्ट्रीय गीत और इससे जुड़े इतिहास पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेलोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए बलिदानी सपूतों को याद किया। उन्होंने वंदे मातरम के इतिहास और आजादी के आंदोलन में इसके योगदानको रेखांकित करते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में गुलामी की बेड़ियों में जकड़े देश को झकझोरने के लिए बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने वंदेमातरम जैसे गीत की रचना की। अपनी वाक्पटुता और भाषणों के लिए चर्चा में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों की तरफ मुखातिबहोकर एक सांसद से उनकी सेहत के बारे में सवाल किया। पीएम मोदी ने जब वरिष्ठ तृणमूल सांसद सौगत राय से पूछा कि आपकी तबीयत कैसी है? तो सदन में ठहाके गूंजे। वंदे मातरम का इतिहास बताने के दौरान पीएम मोदी ने कई बार बांग्ला भाषा में कथनों का उल्लेख किया। इस दौरान विपक्षीसांसदों की तरफ से की गई टिप्पणी पर प्रधानमंत्री ने आभार प्रकट किया। इसी बीच उन्होंने तृणमूल सांसद सौगत रॉय से एक बार फिर कहा, ‘आपकोतो दादा कह सकता हूं न? या उसमें भी एतराज हो जाएगा…’ या उसमें भी एतराज हो जाएगालोकसभा में प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी के बाद चर्चा शुरू हो गई कि उन्होंने ऐसा किसके लिए कहा। हालांकि, पीएम के पूर्व के भाषणों और वरिष्ठनेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंधों को देखते हुए माना जा रहा है कि उन्होंने सौगत रॉय से ही ये बातें कही हैं। बता दें कि पीएम मोदी लोकसभा मेंइससे पहले के भाषणों में अधीर रंजन चौधरी जैसे बंगाल से निर्वाचित सांसदों और नेताओं से भी ऐसे संवाद करते रहे हैं। संसद में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर हो रही चर्चा के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई ऐसी बातें कहीं जो चर्चा का विषय बन गईं। उन्होंने तृणमूलकांग्रेस सांसद सौगत राय से मुखातिब होते हुए कहा, दादा, तबीयत कैसी है आपकी। थोड़ी देर के बाद उन्होंने अपने वक्तव्य के दौरान फिर से पूछा, आपको तो दादा कह सकता हूं न? या उसमें भी एतराज हो जाएगा।’
इंडिगो की उड़ानों में भारी रद्दीकरण, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार “यात्रियों को सलाह जारी”

इंडिगो की उड़ानें लगातार सातवें दिन भी बड़ी संख्या में रद्द हो रही है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लगाकर दखल देने का आग्रह किया गयाथा। हालांकि, शीर्ष कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है औरकार्रवाई कर रही है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, हम जानते हैं कि लाखों लोग फंसे हुए हैं। हो सकता है कि उनमें से कुछ लोगों का जरूरी काम हो औरवे नहीं कर पा रहे हो। लेकिन भारत सरकार ने इस मुद्दे का संज्ञान लिया है। समय पर कदम उठाया गया है। अभी हमें कोई तात्कालिकता नहीं आतीहै। अहमदाबाद हवाई अड्डे पर सुबह आठ बजे तक इंडिगो की 18 उड़ानों को रद्द कर दिया गया। इनमें से नौ उड़ानों का आगमन और नौ का प्रस्थानशामिल था। हालांकि, हवाई अड्डा प्रशासन ने कहा कि टर्मिनल और रनवे का संचालन सामान्य रूप से चल रहा है और यात्रियों की सुविधा का ध्यानरखा जा रहा है। इस दौरान 21 इंडिगो की उड़ानें चलीं, जिनमें सात का आगमन और 14 का प्रस्थान शामिल था। 39 प्रस्थान की उड़ाने शामिल थींबंगलूरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (केआईएएल) पर इंडिगो की कुल 127 उड़ानें रद्द की गईं। इससे 65 आगमन और 62 प्रस्थान की उड़ानेंप्रभावित हुईं। हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आरजीआईए) पर भी गंभीर असर पड़ा। हवाई अड्डा प्राधिकरण के मुताबिक, यहांअभी तक इंडिगो की 77 उड़ानें रद्द हुई हैं, जिनमें 38 आगमन और 39 प्रस्थान की उड़ाने शामिल थीं। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे(आईजीआई) पर इंडिगो की सबसे अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं। कुल 134 उड़ानें रद्द की गईं। इनमें 75 प्रस्थान और 59 आगमन की उड़ानें शामिलथीं। इस बीच, चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुजरात के सरदार वल्लभभाई पटेलअंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, असम के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरडोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री टर्मिनल में फंसे हुए हैं और अपनी उड़ानों के अपडेटका इंतजार कर रहे हैं। तत्काल सुनवाई से इनकार कर दियाजयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी इंडिगो की कई उड़ानें रद्द हुईं, जिनमें हैदराबाद, चेन्नई और दिल्ली के लिए उड़ानें शामिल थीं। हालांकि, हवाईअड्डा प्राधिकरण ने पुष्टि की कि स्थिति सामान्य है और उड़ाने रद्द होने के बावजूद यात्रियों को कोई बड़ी समस्या नहीं हुई। आज सुबह देशभर के प्रमुखहवाई अड्डों पर इंडिगो की उड़ानों में लगातार देरी और उड़ान रद्द होने के बीच आईजीआई ने यात्रियों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की। इसमेंयात्रियों से कहा गया कि वे हवाई अड्डे तक जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें।सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है और कार्रवाईकर रही है।
हैदराबाद की सड़क का नाम ट्रंप पर? भाजपा ने तंज कसा, कहा ‘पहले भाग्यनगर वापस करो’”

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद की एक सड़क का नाम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है। तेलंगानाके सीएम का यह फैसला तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट के दौरान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां पाने की कोशिश लग रहा है। हालांकि इसे लेकर सीएम रेवंतरेड्डी विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं। तेलंगाना भाजपा ने सीएम के इस प्रस्ताव पर तंज कसा है और उनकी आलोचना की है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी नेप्रस्ताव दिया है कि हैदराबाद में अमेरिका महावाणिज्य दूतावास जाने वाली सड़क का नाम ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ रखा जाए। अगर ऐसा होता है तो येदुनिया में पहली बार होगा, जब किसी देश में इस तरह से अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति का सम्मान हुआ हो। गौरतलब है कि हैदराबाद में ये परंपरा रहीहै कि शहर के विकास में योगदान देने वाले राजनेताओं और वैश्विक कंपनियों के नाम पर भी सड़कों के नाम रखे गए हैं, जैसे गूगल स्ट्रीट, जो हैदराबादमें गूगल की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है। इसी तरह वहां ‘माइक्रोसॉफ्ट रोड’ और ‘विप्रो जंक्शन’ हैं। एलान पर भाजपा भड़क गईतेलंगाना से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने तेलंगाना सीएम के इस प्रस्ताव पर तंज कसा है और हैदराबाद का नाम बदलकरभाग्यनगर करने की मांग की। बंदी संजय कुमार ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, ‘हैदराबाद का नाम बदलकर वापस भाग्यनगर करदो। अगर कांग्रेस सरकार नाम बदलने के लिए इतनी ही बेताब है, तो उन्हें कुछ ऐसा करना चाहिए जिसका सच में इतिहास और मतलब हो। हमकितने बुरे हालात में जी रहे हैं – एक तरफ केटी रामाराव, केसीआर की AI मूर्तियां बनाने में व्यस्त है, जबकि वे अभी जिंदा हैं। दूसरी तरफ रेवंत रेड्डी ट्रेंडकरने वालों के नाम पर जगहों का नाम बदल रहे हैं। इस बीच, भाजपा की अकेली पार्टी है, जो सच में सरकार से सवाल कर रही है और धरना के जरिएअसली लोगों के मुद्दे उठा रही है।’ तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद की एक सड़क का नाम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर रखने काप्रस्ताव दिया है। हालांकि इस एलान पर भाजपा भड़क गई है और सीएम पर तंज कसते हुए कहा कि वे पहले हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगरकर दें।
भारत के लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को दिल्ली सफ़ाई कर्मचारी चेयरमैन संजय गहलोत का नमन

सरिता साहनी08 दिसम्बर, 2025सरदार पटेल एक अनमोल नेताभारत के इतिहास में ऐसे बहुत कम नेता आए हैं जिनका योगदान देश के निर्माण और एकता में अमूल्य रहा हो। सरदार वल्लभभाई पटेल ऐसे ही नेताथे। उन्हें भारत का लौहपुरुष कहा जाता है, क्योंकि उनके साहस, धैर्य और दृढ़ निश्चय ने देश को एकजुट किया। सरदार पटेल का जीवन साधारण था, लेकिन उनके विचार और कृतित्व असाधारण थे। दिल्ली के वरिष्ठ नेता संजय गहलोत ने कहा कि सरदार पटेल की दूरदर्शिता और नेतृत्व आज भीयुवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका जीवन सिखाता है कि देशभक्ति, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता से किसी भी कठिन परिस्थिति का सामनाकिया जा सकता है। स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल की भूमिकासरदार पटेल ने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में हमेशा नेतृत्व की भूमिका निभाई। बारडोली सत्याग्रह और अन्य आंदोलनों में उनका योगदान विशेषरूप से उल्लेखनीय है। उनकी मेहनत और साहस ने न केवल किसानों और आम जनता को ताकत दी, बल्कि अंग्रेज़ सरकार को झुकने पर मजबूरकिया। संजय गहलोत ने बताया कि सरदार पटेल की ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा आज भी हमारे लिए प्रेरणादायक हैं। रियासतों का विलय और एकजुट भारतस्वतंत्रता के बाद भारत में 562 रियासतें थीं, जिनमें कई अलगाववादी रुझान रखते थे। सरदार पटेल ने न केवल कूटनीति और समझदारी से, बल्किसाहस और दृढ़ निश्चय से इन रियासतों को भारत में मिलाया। उनके प्रयासों के कारण आज हमारा देश एक मजबूत और संगठित राष्ट्र बन पाया। संजयगहलोत ने कहा कि सरदार पटेल की यह उपलब्धि हमें सिखाती है कि नेतृत्व का मतलब केवल सत्ता नहीं, बल्कि देश की भलाई के लिए सही निर्णयलेना होता है। राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार पटेल का स्मरणसरदार पटेल की जयंती पर हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। इस दिन देशभर में एकता की शपथ ली जाती है, विभिन्नकार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और सरदार पटेल की सोच को याद किया जाता है। संजय गहलोत ने कहा कि यह दिन हमें यह याद दिलाता है किदेश की असली ताकत उसकी एकता में है और हमें हमेशा एकजुट रहना चाहिए। सरदार पटेल की सोच का आज का महत्वआज भारत तेजी से विकास कर रहा है, लेकिन समाज में कई चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। धार्मिक और सामाजिक असमानताएँ, क्षेत्रीय मतभेद औरआपसी विवाद जैसी समस्याएँ सरदार पटेल की शिक्षाओं को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं। संजय गहलोत ने कहा कि हमें सरदार पटेल के आदर्शों कोअपनाना चाहिए और अपने जीवन में उनकी देशभक्ति, साहस और ईमानदारी को उतारना चाहिए। सरदार पटेल के योगदान की अमर छापसरदार वल्लभभाई पटेल ने न केवल भारत को भौगोलिक रूप से जोड़ा, बल्कि लोगों के दिलों को भी एक किया। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने भारतको एक सशक्त राष्ट्र बनाया। संजय गहलोत ने कहा कि आज हम जो भारत देख रहे हैं, उसकी नींव सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प और मेहनत से हीमजबूत हुई है।
पवित्र नगरी अमृतसर में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया गुरु चरणों में नमन

सरिता साहनी8 दिसंबर 2025 , नई दिल्लीअमृतसर की आध्यात्मिक यात्रा दिल्ली सरकार का गुरु साहिब के प्रति आभारदिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपने पूरे कैबिनेट दल के साथ 8 दिसंबर 2025 को गुरु की पावन धरती अमृतसर पहुंचीं। उनकी यह यात्रा किसीऔपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि गुरु साहिब के प्रति गहरी आस्था, कृतज्ञता और धन्यवाद का प्रतीक थी। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले हरमंदिरसाहिब में शीश नवाया और दरबार साहिब में शुकराना अदा करते हुए कहा कि गुरु साहिब की कृपा से ही दिल्ली में ऐतिहासिक ‘गुरमत समागम’ अत्यंत सफल और भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। गुरमत समागम की सफलता को गुरु कृपा का परिणाम बतायामुख्यमंत्री ने अपनी यात्रा के दौरान बताया कि दिल्ली के लाल किला प्रांगण में 23 से 25 नवंबर तक आयोजित तीन दिवसीय ‘गुरमत समागम’ स्वतंत्रभारत के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बन चुका है। इस कार्यक्रम में लगभग छह लाख श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जो अपनेआप में एक रिकॉर्ड है। गुरबाणी कीर्तन, संकीर्तन और आध्यात्मिक सभाओं के उस पवित्र वातावरण को मुख्यमंत्री ने गुरु साहिब का आशीर्वाद कहा।उन्होंने याद किया कि आयोजन से कुछ ही दिन पहले क्षेत्र में बम विस्फोट की घटना हुई थी, जिससे माहौल चिंताजनक था। इसके बावजूद कार्यक्रमका शांतिपूर्ण और सुंदर आयोजन होना गुरु साहिब की ही विशेष कृपा माना गया। इसी आभार को व्यक्त करने मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट आजहरमंदिर साहिब पहुंची। पूरे वर्ष चलेगा गुरु तेग बहादुर साहिब का 350वां शहादत वर्षमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार आगामी पूरे वर्ष गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहादत वर्ष को समर्पित विविधकार्यक्रम और संगोष्ठियाँ आयोजित करेगी। स्कूलों में विशेष पुस्तकों और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों तक गुरु साहिब की शिक्षाओं और बलिदानकी कथा पहुँचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि देशभर में सरकारें और संस्थाएँ गुरु साहिब के इस पावन पर्व को श्रद्धा और सम्मान से मना रही हैं, जो उनकेसार्वभौमिक संदेशों को आगे ले जाने का माध्यम है। दुर्गियाना मंदिर और वाल्मीकि मंदिर के दर्शन कर देश की खुशहाली की कामनाअपनी यात्रा के अगले चरण में मुख्यमंत्री दुर्गियाना मंदिर पहुँचीं, जिसे स्वर्ण मंदिर की तरह ही भव्य स्थापत्य के लिए जाना जाता है। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश और दिल्ली की खुशहाली की कामना की। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि मंदिर (श्री रामतीर्थ मंदिर) में भीदर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि जी की कृपा सबकी रक्षा और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। मुख्यमंत्रीने इस पूरी आध्यात्मिक यात्रा को अपने जीवन का गहरा अनुभव बताया। उनके अनुसार अमृतसर केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा औरप्रेरणा की भूमि है। अमृतसरवासियों के स्नेह और स्वागत से अभिभूत हुईं मुख्यमंत्रीअपनी यात्रा के अंत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अमृतसर के लोगों द्वारा मिले प्रेम और स्नेह के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता का यहप्यार ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। मुख्यमंत्री ने आशा जताई कि गुरु साहिब का आशीर्वाद ऐसे ही बना रहे और इसी प्रेरणा से दिल्ली सरकार आगेभी सेवाभाव, जनकल्याण और ईमानदार शासन की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी।
हादसों के बाद जागने वाली दिल्ली सरकार पर देवेंद्र यादव का तीखा हमला

सरिता साहनी8 दिसंबर 2025,नई दिल्लीदिल्ली की ठंड, बेघर लोग और सरकार की देरीदिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजधानी में जब तक कोईहादसा न हो जाए, तब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। उनके अनुसार हर साल की तरह इस बार भी ठंड बढ़ने के साथ हीसड़कों पर बेघर लोगों की मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार समय रहते कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं करती। वसंत कुंज के कुली कैंप रैन बसेरे में आग लगनेकी घटना और उसमें दो लोगों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सरकार की तैयारी केवल कागजों में होती है। ठंड शुरू होते ही तैयारी होनी चाहिए, न कि दिसंबर मेंदेवेंद्र यादव ने कहा कि रैन बसेरों में कंबल, बिस्तर, भोजन और सुरक्षा की व्यवस्था सितंबर–अक्टूबर में ही पूरी कर दी जानी चाहिए थी। लेकिनसरकार दिसंबर में हादसों के बाद अचानक सक्रिय होती है और बयान जारी किए जाते हैं। उन्होंने भाजपा के मंत्रियों पर तंज कसते हुए कहा कि जबलोग ठंड में मर रहे थे और आग लगने से दो लोगों की जान चली गई, तभी मंत्री नींद से जागकर घोषणाएं करने लगे। उनके अनुसार यह काम करने कातरीका नहीं, बल्कि लापरवाही की नीति है। बेघर लोगों की संख्या ही तय नहीं—सरकार का प्लान कैसे बना?देवेंद्र यादव ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में बेघर और बेसहारा लोगों की वास्तविक संख्या सरकार को पता ही नहीं है। दिल्ली उच्च न्यायालयने वर्षों पहले सरकार को आदेश दिया था कि बेघर लोगों की जनगणना कराई जाए, लेकिन पिछले 11 वर्षों में आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसानहीं किया और अब भाजपा की सरकार को 10 महीने हो गए, फिर भी कोई सही आंकड़ा मौजूद नहीं है। ऐसे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का विंटर एक्शनप्लान किस आधार पर बना और मंत्री आशिष सूद का औचक निरीक्षण किस जानकारी के आधार पर किया गया? यह बात जनता को जानने काअधिकार है। वसंत कुंज रैन बसेरे की आग ने खोली सुरक्षा में खामियों की पोल6 दिसंबर को वसंत कुंज के कुली कैंप रैन बसेरे में आग लगने से दो लोगों की मौत पर भी देवेंद्र यादव ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंनेकहा कि यदि रैन बसेरों में सही सुरक्षा व्यवस्था होती, नियमित निरीक्षण होता और फायर सिस्टम ठीक होता, तो ऐसी घटना टाली जा सकती थी।उन्होंने यह भी कहा कि रैन बसेरों में सुरक्षा, रजिस्ट्रेशन, निगरानी, साफ-सफाई और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं, लेकिन हर बार इन्हें दबा दिया जाता है। आग की इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर नहीं है।पुराने रैन बसेरे बंद, नए का वादा—क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं?देवेंद्र यादव ने बताया कि दिल्ली सरकार के मंत्री आशिष सूद निरीक्षण के दौरान नए 200 रैन बसेरे बनाने की घोषणा कर रहे हैं, जबकि कई पुराने रैनबसेरे पहले ही बंद कर दिए गए थे। पुश्ता के पास चार रैन बसेरे आम आदमी पार्टी के शासन में बंद हुए और नेहरू प्लेस का एक रैन बसेरा वर्तमानसरकार ने बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले बंद किए गए रैन बसेरों की जगह नए शेल्टर खोले जाएं, उसके बाद ही 200 नए रैन बसेरों की बात कीजाए। उनके अनुसार यह सरकार की इवेंट राजनीति है, जिसमें घोषणाएं ज्यादा होती हैं और काम कम। हर मुद्दे पर देरी से काम—सरकार की यह पहचान बन चुकी हैदेवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि चाहे सड़क निर्माण हो या गड्ढों की मरम्मत, यमुना की सफाई हो या प्रदूषण नियंत्रण—हर विषय पर सरकार समय सेकाम करने में असफल रहती है। उनका कहना था कि रेखा गुप्ता सरकार की यही देरी अब दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। नगर निगम सेलेकर दिल्ली सरकार तक, हर स्तर पर निर्णय देर से लिए जाते हैं और जनता को इसका नुकसान उठाना पड़ता है। कंबलों की भारी कमी-सरकार के दावों और जमीनी जरूरतों में बड़ा अंतरउन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने रैन बसेरों के लिए 1,000 कंबल खरीदे हैं, वह भी 2,200 रुपये प्रति कंबल की दर से। लेकिन दिल्ली में 197 स्थायी रैन बसेरे हैं और प्रत्येक रैन बसेरे में औसतन 50 लोगों की व्यवस्था होती है। इस आधार पर कम से कम 10,000 कंबलों की जरूरत है। इसकेअलावा 204 अस्थायी रैन बसेरे भी बनाए गए हैं। इस स्थिति में केवल 1,000 कंबल क्या पूरा दिल्ली शहर सम्हाल पाएगा? उन्होंने कहा कि जबसड़कों पर खुले में लोग पड़े हैं, तब सरकार का खुद को सफल बताना जनता को भ्रमित करने जैसा है। जिम्मेदारी निभाए सरकार, जनता को भ्रमित न करेअंत में देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली सरकार को बयानबाजी छोड़कर अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। बेघर लोगों की सुरक्षा, रैन बसेरों कीव्यवस्था, कंबलों और भोजन की उपलब्धता तथा आग से बचाव के इंतजाम तुरंत किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि हर साल ठंड से मौतें और रैनबसेरों में बदहाल स्थितियां दिल्ली की छवि को ही नहीं बल्कि मानवता को भी चोट पहुँचाती हैं। सरकार को समय पर काम करना होगा, तभी दिल्लीके गरीब, बेसहारा और बेघर लोगों की जिंदगी सुरक्षित हो सकेगी।
दलितों की ज़मीन पर सुनियोजित कब्ज़ा —संजय सिंह ने योगी सरकार के मंत्री पर लगाया बड़ा आरोप

सरिता साहनी8 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीआम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यूपी के ऊर्जा राज्य मंत्रीसोमेन्द्र तोमर ने मेरठ के एक गांव में दलित समाज की ज़मीनों पर योजनाबद्ध तरीके से कब्ज़ा किया है। संजय सिंह ने कहा कि यह सिर्फ़ एक आरोपनहीं बल्कि दस्तावेज़ों और सरकारी प्रमाणपत्रों के आधार पर सिद्ध सच है, जिसे अब पूरे देश के सामने लाने का समय आ गया है। दलितों की ज़मीन हड़पने की पूरी साज़िश तैयार की गई – संजय सिंह का आरोपसंजय सिंह के अनुसार मंत्री ने दलितों की 47 ज़मीनों को एक ऐसी योजना के अंतर्गत खरीदा, जिसे बिना सरकारी सिस्टम के दुरुपयोग के अंजाम देनासंभव नहीं था। उन्होंने कहा कि ज़मीन खरीदने की प्रक्रिया इतनी तेज़ी और समान ढंग से हुई कि यह साफ़ हो गया कि सब कुछ पहले से तय था।सामान्य परिस्थितियों में दलित समाज की ज़मीन खरीदने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होती है, लेकिन जिन दस्तावेज़ों की वे बात कर रहे थे, उनमें दिखाया गया है कि किसी महामारी की तरह एक ही गांव के लोग अचानक गंभीर बीमार घोषित हो गए, और फिर उन्हें ज़मीन बेचने की अनुमतिमिल गई। अंकुश चौधरी ने खोला पूरा मामला-47 दलितों को कैसे बीमार दिखाया गयासंजय सिंह के बाद आम आदमी पार्टी के नेता अंकुश चौधरी ने विस्तार से पूरा मामला पत्रकारों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि कायस्थ गौंडी गांवके 47 दलित परिवारों की ज़मीनें एक ही मंत्री ने खरीदीं। पर सवाल यह है कि ऐसा हुआ कैसे? उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार दलित समाज केव्यक्ति को अपनी ज़मीन बेचने के लिए या तो गंभीर बीमारी का प्रमाण देना होता है, या फिर यह साबित करना होता है कि वह रोज़ी-रोटी के लिएगांव छोड़कर दूसरे शहर जा रहा है। लेकिन यहां स्थिति अजीब थी। अगस्त से सितंबर 2024 के बीच एक ही गांव के दर्जनों लोग अचानक गंभीरबीमार घोषित कर दिए गए। 11 लोग एक ही दिन में बीमारी का सर्टिफिकेट लेने पहुंचे, फिर कुछ दिन बाद 35 लोग। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा गांवकिसी अजीब बीमारी की चपेट में आ गया हो। मेडिकल टीम ने 37 लोगों को गंभीर बीमार घोषित कर दिया, और 9 लोगों को विस्थापित बताया।यह सब दस्तावेज़ों में दर्ज है। यही नहीं, इन सभी लोगों को कुछ ही दिनों में जिलाधिकारी के अधिकार पर परमिशन मिल गई, और 47 लोगों कीज़मीन का बैनामा सिर्फ़ एक ही दिन—13 सितंबर 2024 को कर दिया गया। सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का गंभीर आरोप—एक ही दिन में सभी ज़मीनें मंत्री के नामपूरा मामला इस वजह से और भी संदिग्ध हो जाता है क्योंकि 47 बैनामे एक ही दिन में मंत्री के नाम पर दर्ज हुए। अंकुश चौधरी ने कहा कि यह सिर्फ़संयोग नहीं हो सकता। यह वही इलाका है जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक इंटीग्रेटेड टाउनशिप का शिलान्यास कर चुके हैं। मंत्री को पहले सेजानकारी थी कि कहां कौन-सा प्रोजेक्ट आ रहा है, और इसी जानकारी का फायदा उठाकर उन्होंने औने-पौने दामों में दलितों की ज़मीनें खरीद लीं।उन्होंने कहा कि दलित समाज के लोग इतने गंभीर बीमार थे तो मंत्री ने उनकी मदद क्यों नहीं की? उनकी दवाई क्यों नहीं करवाई? बल्कि उन्होंनेउनकी मजबूरी का फायदा उठाया। यह किसी मंत्री का चरित्र नहीं हो सकता जो गरीब और दलित के हितों की रक्षा करने की शपथ लेता है। सत्य उजागर होने पर मंत्री का जवाब—5 करोड़ का मानहानि नोटिसअंकुश चौधरी ने कहा कि इस घोटाले का खुलासा करने के बाद मंत्री पर कार्रवाई तो नहीं हुई, बल्कि उल्टा आम आदमी पार्टी के नेताओं को 5 करोड़रुपये की मानहानि का नोटिस भेज दिया गया। उनका कहना था कि हम बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए अधिकारों को जानते हैं औरदलित समाज का शोषण किसी भी हाल में नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि चाहे मंत्री 5 करोड़ का नोटिस दें या 50 करोड़ का, हम सड़कों पर भी लड़ेंगेऔर संसद में भी आवाज़ उठाएंगे। सुनियोजित साज़िश के बिना यह संभव नहीं थासंजय सिंह ने कहा कि अगर 47 दलित लोग सच में बीमार थे, तो मंत्री ने उनके इलाज के लिए क्या किया? उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर सभी लोगएक ही व्यक्ति के पास अपनी ज़मीन बेचने क्यों पहुंचे? यह दिखाता है कि यह पूरा मामला सोचे-समझे तरीके से चलाया गया। उन्होंने कहा कि आमआदमी पार्टी इस लड़ाई को सिर्फ़ मेरठ तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि संसद तक ले जाएगी और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन भी करेगी। वंदे मातरम् को लेकर भाजपा पर तीखा प्रहार-देशभक्ति को ढाल मत बनाओपत्रकारों द्वारा वंदे मातरम् पर सवाल पूछे जाने पर संजय सिंह ने भाजपा पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हर कार्यक्रम मेंभारत माता की जय और वंदे मातरम् का नारा लगाती है। लेकिन सवाल यह है कि जब भगत सिंह, बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान जैसे क्रांतिकारीवंदे मातरम् बोल रहे थे, तब आरएसएस और भाजपा के राजनीतिक पूर्वज क्या कर रहे थे? उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि सावरकर, श्यामाप्रसाद मुखर्जी और अन्य नेताओं ने अंग्रेजों के साथ मिलकर ऐसे फैसले लिए जो आज भी सवाल खड़े करते हैं। संजय सिंह ने कहा कि भाजपा अपनाहर गुनाह वंदे मातरम् और धर्म के नारों के पीछे छिपाने की कोशिश करती है। जबकि देशभक्ति का मतलब देश को बेचना नहीं, बल्कि उसकी रक्षाऔर उसकी संपत्ति को बचाना है। देशभक्ति का मतलब मातृभूमि की वंदना है, न कि उसे बेच देनाउन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने एयरपोर्ट, सीपोर्ट, जंगल, खदानें, रेल, गैस, पानी—सब बेच दिया। उन्होंने भागलपुर का जिक्र करते हुए कहा किएक रुपये में 1050 एकड़ जमीन और 10 लाख पेड़ अडानी को दे दिए गए। उन्होंने कहा कि यह कैसा वंदे मातरम् है जहां मातृभूमि को ही बेच दियाजाता है? धार्मिक नारों से नाकामी छिपाने की राजनीति पर करारा हमलाउन्होंने कहा कि भाजपा के एक मंत्री के पास जब लोग बिजली की समस्या लेकर गए तो उसने जय श्रीराम और जय बजरंगबली कहकर बात टाल दी।संजय सिंह ने पूछा कि क्या भगवान ने आपको बताया है कि जनता को बिजली न दो और धर्म के नारों की आड़ में अपनी नाकामियां छिपाओ?सच्चाई दबेगी नहीं, हम लड़ाई जारी रखेंगेसंजय सिंह ने कहा कि चाहे मंत्री नोटिस भेजें, चाहे धमकाएं, आम आदमी पार्टी पीछे हटने वाली नहीं है। वे संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे कोउठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दलितों की ज़मीन पर कब्ज़ा सिर्फ़ एक कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक अन्याय है, और इस अन्याय के खिलाफ हरकीमत पर लड़ाई लड़ी जाएगी।