सुधा मूर्ति का संदेश तकनीक नहीं, समाज बदलने वाले नवाचारों को भी मिले सम्मान “नवाचार के लिए बने विशेष अवार्ड श्रेणी”

राज्यसभा की मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने गुरुवार को कहा कि हम तकनीकी उपलब्धियों की तो खूब सराहना करते हैं, लेकिन वहीं समाज की रोजमर्राकी समस्याओं का हल निकालने वाले असली नवाचार करने वालों को पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक नवाचार करनेवाले लोग, जो आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए नए तरीके और समाधान खोजते हैं, उन्हें भी उतनी ही अहमियत और सम्मान मिलनाचाहिए। उनका काम सीधे समाज की भलाई से जुड़ा होता है। शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए मूर्ति ने कहा कि इडली ग्राइंडर जैसे नवाचारोंने जीवन को बदल दिया है, विशेष रूप से महिलाओं के जीवन को, फिर भी उनके आविष्कारकों को काफी हद तक भुला दिया गया है। आगे उन्होंनेकहा, “जब आप कोई तकनीकी नवाचार करते हैं, तो आपकी उपलब्धियों के लिए आपका सम्मान किया जाता है, आपको पुरस्कार मिलता है, लोगताली बजाते हैं, लेकिन जब अन्य उपलब्धियों की बात आती है, तो लोग परवाह नहीं करते।” राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में कहावैश्विक उदाहरणों की करते हुए मूर्ति ने क्यूआर कोड के जापानी आविष्कारक का हवाला दिया, जिन्होंने अपने नवाचार का पेटेंट नहीं कराने का विकल्पचुना, जिससे यह दुनिया भर में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हो गया। उनका कहना था कि इसे मुफ्त में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसाइसलिए किया क्योंकि ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ (बहुत से लोगों के कल्याण और सुख के लिए)।” मनोनीत सदस्य ने कहा कि अगर सरकार नेविभिन्न श्रेणियों में कई पुरस्कार स्थापित किए हैं। कॉर्पोरेट मामलों के विभाग द्वारा सीएसआर मान्यता से लेकर वाणिज्य और उद्योग विभाग द्वाराप्रौद्योगिकी पुरस्कार तक। लेकिन सामाजिक नवाचार के लिए कोई समर्पित पुरस्कार श्रेणी नहीं है। “मैं भारत सरकार से अनुरोध करती हूं कि वह एकनई पुरस्कार श्रेणी सामाजिक नवाचार श्रेणी शुरू करे, ताकि सामाजिक नवाचार को मान्यता और सम्मान मिल सके और हम सभी समाज को इसकालाभ मिल सके।”राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में कहा है कि जो लोग आम लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए काम कर रहे हैं उन्हें सम्मान मिलनाचाहिए। उन्होंने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया।
भारत से दूर, पाकिस्तान-चीन की ओर! बांग्लादेश में नया भू-राजनीतिक झुकाव, यूनुस शासन में दिल्ली से दूरी, इस्लामाबाद से नजदीकी

बांग्लादेश में पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद से ही स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं। खासकर मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में बांग्लादेश लगातारकट्टरपंथ की तरफ बढ़ा है। आलम यह है कि उसकी विदेश नीति भी भारत से दूर होकर पाकिस्तान पर केंद्रित होती दिख रही है। इसका एक उदाहरणबुधवार को मिला, जब बांग्लादेश के मौजूदा विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह कूटनीतिक तौर पर संभव है किबांग्लादेश, पाकिस्तान के उस क्षेत्रीय गठबंधन में शामिल हो जाए, जिसमें भारत शामिल नहीं है। बांग्लादेश की न्यूज एजेंसी संवाद संस्था (बीएसएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, तौहीद ने कहा कि इस तरह के कूटनीतिक समूह में नेपाल और भूटान का शामिल होना शायद संभव न हो। उन्होंने कहा, “यहहमारे लिए (बांग्लादेश के लिए) कूटनीतिक तौर पर संभव है, लेकिन नेपाल और भूटान का पाकिस्तान के साथ किसी समूह में शामिल होना, वह भीजिसमें भारत न हो, के साथ जुड़ना मुमकिन नहीं है।” ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुएतौहीद ने कहा कि इशाक डार ने कुछ कहा है और किसी मौके पर इसमें प्रगति भी हो सकती है। हालांकि, उन्होंने मामले पर आगे टिप्पणी से इनकारकर दिया और कहा कि उन्हें ऐसे गठबंधन के बारे में मीडिया से ही जानकारी मिली है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार नेहाल ही में दावा किया था कि बांग्लादेश-चीन और पाकिस्तान का त्रिपक्षीय गठबंधन बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है और इसे बाकी क्षेत्रीय और क्षेत्रके बाहर की ताकतों को शामिल कर के बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने और मोहम्मद यूनुस कीअंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही इस देश का रुख पाकिस्तान की तरफ नरम हुआ है। बांग्लादेश ने उसी देश के साथ अपने रिश्तों कोगहरा करना शुरू कर दिया है, जिसकी सत्ता ने कभी पूर्वी पाकिस्तान में बांग्ला भाषियों पर जुल्म ढाए थे। यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश और पाकिस्तानके बीच रक्षा, व्यापार, कूटनीतिक और ढाचांगत मामलों से जुड़ी चर्चाएं और समझौते हुए हैं। यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिलीगौरतलब है कि दक्षिण एशिया में भारत के बिना अलग-अलग देशों के गठबंधन की चर्चाओं को चीन ने ही जोर-शोर से बढ़ाया। इस एवज में चीन नेइस साल जून में एक त्रिपक्षीय बैठक भी रखी थी, जिसमें चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सचिव स्तर के अधिकारियों की मुलाकात हुई थी। इसबैठक को चीन के कुनमिंग में रखा गया था। इसी दौरान ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान और चीन साथ में एक नया क्षेत्रीय गठबंधन बनाने कीतैयारी कर रहे हैं, जो कि सार्क (साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपेशन) का विकल्प बन सकता है। चूंकि सार्क में भारत सबसे प्रमुखताकत वाला देश है, इसलिए पाकिस्तान की आवाज इस संगठन में कमजोर पड़ जाती है। सार्क बीते कुछ वर्षों में पूरी तरह से निष्क्रिय है। 2016 मेंपाकिस्तानी आतंकी संगठनों की तरफ से अंजाम दिए गए उड़ी हमले के बाद से ही इस संगठन की प्रमुख बैठकें नहीं हुई हैं। इसी मौके का फायदाउठाकर पाकिस्तान ने चीन की मदद से दक्षिण एशिया में भारत के बिना एक गठबंधन बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं। चूंकि बांग्लादेश में भी भारत कासमर्थन करने वाली शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया, ऐसे में पाकिस्तान को यूनुस सरकार को अपने साथ लाने में सफलता मिली।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा एक्शन! पौड़ी के DFO तुरंत हटाए गए, मानव–वन्यजीव संघर्ष पर सख्त आदेश

वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को एस्कार्ट की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरानअधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने पौड़ी में मानव -वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत पौड़ी के डीएफओ कोतत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मानव वन्यजीवसंघर्ष को खत्म करने के लिए वन विभाग के साथ ही शासन-प्रशासन के स्तर पर भी प्रभावी प्रयास किए जाने की बात कही। कहा कि यह सुनिश्चितकिया जाए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना की सूचना मिलने के 30 मिनट के अंदर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच जाए। इसके लिए संबंधितडीएफओ और रेंजर की जिम्मेदारी तय की जाए। प्रभावितों को आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाएमुख्यमंत्री ने पौड़ी में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के दृष्टिगत पौड़ी के डीएफओ को तत्काल प्रभाव से वहां से हटाने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों का अधिक भय है, ऐसे क्षेत्रों में स्कूली बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और घर तक लाने के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा एस्कॉर्ट की व्यवस्था की जाए। सीएम धामी ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में किसी परिवार से कमाने वाले व्यक्ति की मृत्यु होने पर उनके परिवार को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना, ऐसी स्थिति से निपटने के लिएवन विभाग प्रभावित परिवार की आजीविका को सहायता देने के लिए दो सप्ताह के अंदर नीति बनाकर दें। कहा कि जनपदों में मानव-वन्यजीव संघर्षको कम करने के लिए जिन भी उपकरणों की आवश्यकता है, उन्हें यथाशीघ्र उपलब्ध कराया जाए। वन्य जीवों की मौजूदगी को लेकर जागरुक किया जाएसीएम ने कहा कि हमारी पहली जिम्मेदारी वन्यजीवों से लोगों के जीवन को बचाना है, इसके लिए नई तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दियाजाए। जंगली जानवर आबादी क्षेत्रों में न आये, इसके लिए स्थाई समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। वन्यजीवों की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों मेंकैमरों के माध्यम से निरंतर नजर बनाये रखें। वन कर्मी लगातार निगरानी रखें, साथ ही ग्रामीणों के साथ अपना संवाद मजबूत रखें। मुख्यमंत्री ने कहाकि बस्तियों के आस पास जंगली झाडियों को अभियान चलाकर साफ किया जाए, साथ ही बच्चों और महिलाओं को विशेष तौर पर आस पास वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर जागरुक किया जाए।
कुपवाड़ा – पुंछ में अब शिक्षक करेंगे आवारा कुत्तों की निगरानी, स्कूलों में नई जिम्मेदारी लागू कड़ा मॉनिटरिंग सिस्टम

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा और पुंछ जिलों में शिक्षक कक्षा से इतर अब कुत्तों की निगरानी करेंगे। दोनों जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) नेसरकारी और निजी दोनों स्कूलों के शिक्षकों को अलग तरह की ये एक नई जिम्मेदारी सौंपी है। शिक्षक अब स्कूलों के भीतर और बाहर आवारा कुत्तों वइनसे संबंधित घटनाओं की निगरानी और प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने ये कदम स्कूलों में विद्यार्थियोंऔर स्टाॅफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अप्रत्याशित रूप से उठाया है। इसमें कहा गया है कि प्रत्येक स्कूल में एक नोडल अधिकारी नामितकरना अनिवार्य है। कुपवाड़ा के सीईओ ने जिले के सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों, जोनल एजुकेशन अफसर (जेडईओ) और हेडमास्टरों को आधिकारिकनिर्देश जारी किया है। स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगाइसमें कहा गया है कि स्कूलों के अंदर और बाहर प्रमुख स्थानों पर ”कुत्तों से सावधान रहें” संदेश वाले साइनबोर्ड लगाए जाएं। ये अनिवार्य हैं ताकिआवारा कुत्तों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। नोडल अधिकारी को अनुपालन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसी तरह के निर्देश सीईओ पुंछ नेजारी किए हैं। यहां मुख्य जोर समन्वय पर है और सभी सरकारी और निजी स्कूलों के ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) और संस्थानों के प्रमुखों(एचओआई) को आवारा कुत्तों पर निगरानी और समन्वय के लिए नोडल अधिकारी बनाने का निर्देश दिया गया है। सीईओ की ओर से जारीआधिकारिक निर्देश में लिखा है कि नोडल अधिकारी आवारा कुत्तों को देखे जाने और उनसे जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार होगा। इसकेअलावा नोडल अधिकारी जरूरी कार्रवाई के लिए संबंधित नगर पालिका, पशुपालन, स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगा। एक सख्त प्रयास माना जा रहासुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुंछ जिले में आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए जिला उपायुक्त ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक ली थी।इसमें आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और पशु जन्म नियंत्रण पर गंभीर चर्चा की गई थी। इस बैठक के बाद अब सीईओ ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किएहैं। सीईओ के जारी निर्देशों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इनके पालन में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा औरसंबंधित अधिकारियों व शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह कदम स्कूलों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त प्रयास मानाजा रहा है
लोकदल प्रमुख सुनील सिंह का सपा बीजेपी पर आरोप “नीतियाँ नहीं, सिर्फ नारे बदलते हैं… महिलाओं को फिर बनाया जा रहा वोट बैंक”जानें क्या कुछ कहा”

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की सरगर्मी के बीच राजनीतिक दल अपने-अपने वादों और घोषणाओं के साथ मैदान में हैं। इसी क्रम में समाजवादीपार्टी द्वारा ग़रीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने के वादे ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सपा के इस घोषणा पत्र-शैली वादे पर अब लोकदलके राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने एक कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सुनील सिंह ने कहा कि यूपी की राजनीति फिर से उसी पुरानी स्क्रिप्ट पर लौट आईहै, जहाँ चुनाव आते ही बड़ी-बड़ी घोषणाएँ और सपने परोसे जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद इन वादों का कोई अता-पता नहीं रहता। वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीतिलोकदल प्रमुख ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि बीजेपी और सपा में मूल अंतर केवल प्रतीकों और नारों का है, नीयत का नहीं। उनके अनुसार बीजेपी नेमहंगाई, बेरोज़गारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जनता को निराश किया। दूसरी ओर, सपा अपने पुराने शासन के विफल रिकॉर्ड कोभुलाकर नए वादों की चमक से जनता को फिर से भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। सुनील सिंह ने कहा कि दोनों ही पार्टियों का ट्रैक रिकॉर्ड यहदिखाता है कि वादे बड़े होते हैं, लेकिन काम शून्य। जनता को चुनाव से पहले सपने दिए जाते हैं, और बाद में वही सपने टूटे हुए मिलते हैं। समाजवादीपार्टी की 40,000 रुपये वाली योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील सिंह ने कहा कि महिलाओं को वोट बैंक समझने की राजनीति सबसे खतरनाकराजनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों को महिलाओं की याद केवल चुनाव के समय आती है। पाँच साल तक महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर कोई ठोस काम नहीं होता। और जैसे ही चुनाव नज़दीक आते हैं, पार्टियाँ वादों की झड़ी लगा देती हैं।सुनील सिंह ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के लिए वास्तविक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए नीति, संवेदना और निरंतर प्रयास कीज़रूरत है न कि चुनावी लुभावने दावों की।
गरीबों के साथ छलावा – अटल कैंटीन योजना पर देवेन्द्र यादव का बड़ा आरोप

सरिता साहनी10 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीदिल्ली की झुग्गी बस्तियों में बढ़ी राजनीतिक बहसदिल्ली में झुग्गीवालों के लिए शुरू की जा रही अटल कैंटीन योजना ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षदेवेन्द्र यादव ने इस योजना पर गम्भीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार गरीबों को राहत देने का दिखावा कर रही है, जबकि असलियत मेंझुग्गीवालों के लिए कुछ भी ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने इसे गरीबों को भ्रम में रखने की कोशिश बताया। झुग्गीवालों के घर तोड़े, अब भोजन का वादा देवेन्द्र यादव का आरोपअपने बयान में देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने कई जगहों पर झुग्गियों पर बुलडोज़र चलवाकर हजारों परिवार बेघर कर दिए। जिन लोगोंको घर से उजाड़ा गया, उन्हीं को अब 5 रुपये की थाली देने का वादा किया जा रहा है। उनके अनुसार भाजपा पहले लोगों को तकलीफ देती है, फिरछोटी योजनाओं के नाम पर खुद को गरीबों की हितैषी बताने लगती है। उन्होंने कहा कि यह नीति झुग्गीवालों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्किउनकी मजबूरियों का फायदा उठाने की कोशिश है। 30 लाख लोगों के लिए सिर्फ 100 अटल कैंटीन कितनी कारगर योजना?दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में करीब 30 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं, जहाँ 675 जेजे क्लस्टर मौजूद हैं। लेकिन सरकार ने सिर्फ 100 अटल कैंटीनशुरू करने की घोषणा की है। हर कैंटीन पर सुबह 500 और शाम को 500 थालियां देने की बात कही गई है। यह संख्या सिर्फ 50,000 लोगों तकही पहुँच सकती है, जबकि वास्तविक जरूरत कई गुना अधिक है। देवेन्द्र यादव के अनुसार यह व्यवस्था ऐसी है, जिसमें एक बड़े समुदाय कोनज़रअंदाज़ कर सिर्फ सीमित लोगों को ही खाना मिल पाएगा। उन्होंने इसे “पिक एंड चूज़” की व्यवस्था बताया, जहाँ सरकार चुनिंदा लोगों को हीसुविधा देगी। महंगाई और बेरोजगारी के बीच सस्ती थाली की वास्तविकताउन्होंने कहा कि आज दिल्ली में बेरोजगारी और महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे झुग्गी बस्तियों में अपराध भी फैल रहा है। ऐसे माहौल में सस्तेखाने के लिए लगने वाली भीड़ और कतारें हालात को और बिगाड़ सकती हैं। सरकार ने इस पक्ष पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया कि भारी भीड़ की स्थितिमें संघर्ष और अव्यवस्था पैदा हो सकती है। गरीब परिवारों के पास रोज़मर्रा की परेशानियाँ पहले से ही बहुत हैं, ऐसे में खाना पाने के लिए लंबी लाइनेंउनकी समस्या और बढ़ा सकती हैं। महिलाओं और गरीबों से किए गए वादों से बचने का आरोपदेवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने महिलाओं को 2500 रुपये मासिक देने, गैस सिलेंडर 500 रुपये में उपलब्ध कराने और त्योहारों पर सिलेंडरदेने जैसे वादे किए थे। लेकिन इन वादों से बचने के लिए अब गरीबों के सामने 5 रुपये की अटल थाली की घोषणा रख दी गई है। उनके अनुसारसरकार वास्तविक समस्याओं को हल करने की बजाय जनता को छोटे-छोटे भ्रमों में उलझा रही है ताकि बड़े मुद्दे पीछे छिप जाएं। शिलान्यास तो हुआ, पर काम शुरू नहीं तैयारी पर सवालभाजपा की ओर से कहा गया है कि 25 दिसंबर को दिल्ली में 100 अटल कैंटीन शुरू कर दी जाएंगी। लेकिन देवेन्द्र यादव ने बताया कि नवंबर केआखिरी सप्ताह में कई कैंटीनों का सिर्फ शिलान्यास हुआ है और अभी तक योजना का टेंडर भी पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद इतने कम समय में 100 कैंटीन तैयार करना असंभव लग रहा है। उन्होंने इसे सिर्फ कागज़ी घोषणा बताया, जिसका मकसद लोगों को प्रभावित करना है, न कि वास्तविक कामकरना। बायोमेट्रिक टोकन सिस्टम गरीबों पर नई बाधा?योजना के अनुसार, एक व्यक्ति एक बार से ज्यादा खाना न ले सके, इसके लिए सरकार बायोमेट्रिक टोकन प्रणाली लागू करेगी। देवेन्द्र यादव काकहना है कि रोज़ दिहाड़ी पर काम करने वाले गरीब मजदूरों के लिए यह नई मुसीबत होगी। वे पहले ही अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं, अब खाने के लिए डिजिटल टोकन की प्रक्रिया उनके लिए और परेशानियाँ खड़ी करेगी। दिल्ली के कलस्टरों की वास्तविक स्थिति और सरकार की अनदेखीदिल्ली में 675 अधिकृत जेजे क्लस्टर, 173 अनधिकृत क्लस्टर और लगभग 80 ऐसे क्षेत्र हैं जिनका कोई रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं है। इन सभीजगहों पर रहने वाले लाखों लोग अब भी जीवन की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा की जिम्मेदारी है कि इन क्षेत्रों मेंरहने वाले लोगों के घर, रोजगार, सुरक्षा और शिक्षा की व्यवस्था करे, लेकिन इसके बजाय सरकार सिर्फ घोषणाओं और झूठे दावों में लगी है। कई बड़ी घोषणाएँ, लेकिन काम एक भी नहीं विपक्ष का निशानाउन्होंने कहा कि पिछले 10 महीनों में भाजपा सरकार ने सड़क, पेयजल, एसटीपी, कूड़े के पहाड़, प्रदूषण नियंत्रण, यमुना सफाई और बस सेवाओं कोबढ़ाने जैसे कई बड़े दावे किए हैं। लेकिन इनमें से किसी पर भी काम शुरू नहीं हुआ। ऐसे में अटल कैंटीन योजना पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकिइसका भी हश्र बाकी घोषणाओं जैसा हो सकता है। अटल कैंटीन योजना गरीबों के जीवन में कितना बदलाव लाएगी?देवेन्द्र यादव का स्पष्ट कहना है कि यह योजना गरीबों के जीवन में वास्तविक सुधार नहीं ला पाएगी। इस योजना के जरिए लाखों झुग्गीवालों कीसमस्याओं को नजरअंदाज करके सिर्फ एक छोटी सुविधा का वादा किया जा रहा है, जो जरूरत के मुकाबले बहुत कम है। उन्होंने कहा कि दिल्ली कीगरीब बस्तियों को सिर्फ सस्ती थाली नहीं, बल्कि घर, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की जरूरत है। जब तक सरकार इन मूलभूत मुद्दों पर कामनहीं करेगी, तब तक अटल कैंटीन जैसी घोषणाएँ सिर्फ दिखावा ही रहेंगी।
हस्तसाल वार्ड 108 में सफाई व्यवस्था की बड़ी समीक्षा – आशीष सूद का दौरा

सरिता साहनी10 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीस्वच्छ दिल्ली के लिए मंत्री का जमीनी निरीक्षणदिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने वार्ड संख्या 108, हस्तसाल और उसके आसपास के इलाकों में सफाई, कूड़ा प्रबंधन और जल निकासीकी व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया। उनका उद्देश्य था कि हर वार्ड में लोगों को स्वच्छता से जुड़ी सेवाएं समय पर और बेहतर तरीके से मिलें। स्थानीय लोगों ने बताई समस्याएँ, मंत्री ने लिया संज्ञाननिरीक्षण के दौरान स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने मंत्री को कई गंभीर समस्याओं से अवगत कराया। विकासपुरी स्थित डीएवी स्कूल के सामनेकूड़े का बड़ा ढेर लगा होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके अलावा रोड नंबर 237 पर कई जगह सीवर के ढक्कन खुले हुए मिले, जिससे दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ था। सड़क पर जगह-जगह कूड़ा जमा रहने से लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार का संकल्प समयबद्ध और प्रभावी सफाई सेवाएँआशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि हर वार्ड में साफ-सफाई की व्यवस्था मजबूत हो। कूड़ा उठाने से लेकर नालोंकी सफाई तक सभी काम नियमित और प्रभावी तरीके से हों। इसी उद्देश्य से वह खुद विभिन्न इलाकों में जाकर स्थिति का आकलन कर रहे हैं औरअधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। सफाई प्रणाली, कूड़ा प्रबंधन और नालों की स्थिति की विस्तृत समीक्षानिरीक्षण में मंत्री ने कूड़ा संग्रहण की प्रक्रिया, कूड़े के परिवहन और उसके निस्तारण से जुड़ी व्यवस्थाओं को करीब से देखा। साथ ही नालों की सफाईऔर जल निकासी की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर कार्य समय पर पूराकिया जाए। दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच बेहतर समन्वय की जरूरतसूद ने साफ कहा कि दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच लंबे समय से चली आ रही खींचातानी को खत्म होना चाहिए। दोनों संस्थाओं के बीचमजबूत समन्वय होगा तभी दिल्ली की सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का दौर खत्म करके मिलकर काम करने कासमय आ गया है ताकि दिल्ली को स्वच्छ और विकसित बनाया जा सके। नागरिकों की भागीदारी को बताया स्वच्छता की कुंजीमंत्री ने कहा कि स्वच्छता सिर्फ सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि नागरिकों के सहयोग से ही यह अभियान सफल हो सकता है। दिल्लीसरकार और एमसीडी मिलकर काम करें, साथ ही लोग भी साफ-सफाई को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, तभी सकारात्मक बदलाव आएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और मंत्रियों का लगातार फील्ड निरीक्षणउन्होंने यह भी बताया कि माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य मंत्री भी स्वयं फील्ड में जाकर सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों का निरीक्षणकर रहे हैं। लक्ष्य है कि हर वार्ड को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित बनाया जाए। लापरवाही पर सख्त कार्रवाई का निर्देशमंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सफाई और कूड़ा प्रबंधन से जुड़ी किसी भी एजेंसी द्वारा की गई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंनेकहा कि दिल्ली सरकार लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है और हर शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की जाएगी। स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित दिल्ली की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदमशहरी विकास मंत्री का यह निरीक्षण अभियान इस दिशा में एक बड़ा कदम है कि दिल्ली के हर वार्ड को बेहतर सुविधाएँ और साफ-सुथरा वातावरणमिले। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में दिल्ली की सफाई व्यवस्था और भी मजबूत और पारदर्शी हो।
भाजपा शासित MCD में कूड़े के नाम पर खुली लूट – सौरभ भारद्वाज का आरोप

सरिता साहनी10 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीभाजपा के अपने पार्षद ने खोली भ्रष्टाचार की परतेंदिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में भ्रष्टाचार के बड़े आरोप तब सामने आए जब भाजपा के वरिष्ठ पार्षद राजपाल ने ही स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में अपनीही सरकार पर गंभीर सवाल उठा दिए। इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने प्रेस वार्ता कर खुलकर रखा औरभाजपा पर तीखा हमला बोला। भाजपा पार्षद के खुलासे ने खड़ा किया बड़ा सवालसौरभ भारद्वाज ने बताया कि भाजपा पार्षद राजपाल ने खुलासा किया है कि एमसीडी में कूड़े के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी हो रही है। निजी कंपनियांट्रकों में बिल्डिंग का मलबा लैंडफिल साइट पर ले जाकर कूड़े के तौर पर तौलवा देती हैं और भारी-भरकम पेमेंट ले लेती हैं। इससे यह साफ है किअसली कूड़ा तो कई जगह उठ ही नहीं रहा, लेकिन बिल्डिंग माफिया और ठेकेदार करोड़ों कमा रहे हैं। कूड़ा सड़कों पर, लेकिन कंपनियों को लगातार भुगतानसौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों में कूड़ा सड़ रहा है, घरों से कूड़ा उठ नहीं रहा, फिर भी ठेकेदारों को 2250 से 2750 रुपये प्रति टनभुगतान जारी है। भाजपा पार्षद के मुताबिक, ठेकेदार कूड़ा उठाने की बजाय निर्माण कार्य का मलबा तौलवाते हैं, जो ज्यादा भारी होता है, और उसीआधार पर मोटा पैसा बनाया जा रहा है। एमसीडी में लगाए गए बाहर के अधिकारी, कोई जवाबदेही नहींएक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि एमसीडी के 12 जोन में एक भी डिप्टी कमिश्नर अपने ही कैडर का नहीं है। कोई सांख्यिकी सेवा से आया है, कोईरेलवे सेवा से, और प्रतिनियुक्ति के नाम पर इन्हें डीसी बनाकर बैठा दिया गया है। सौरभ भारद्वाज का कहना है कि यही अधिकारी एमसीडी में खुलीलूट का हिस्सा हैं और पांच साल में इतना कमा लेते हैं कि उनकी कई पीढ़ियों को काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डीसी बादल कुमार पर बिल्डिंग माफिया से साठगांठ का आरोपभाजपा पार्षद पंकज लूथरा ने शाहदरा जोन के डीसी बादल कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह बिल्डिंग माफिया से पैसा लेते हैं। इसके बावजूदएमसीडी कमिश्नर ने उन्हें उनके मूल विभाग में नहीं भेजा। बल्कि उल्टा कमिश्नर ने पार्षद पर ही आरोप लगा दिया। यह स्थिति बताती है कि व्यवस्थामें ऊपर से नीचे तक गहरी गड़बड़ है। गृह मंत्रालय पर उठे सवालसौरभ भारद्वाज ने सवाल किया कि आखिर केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार दूसरे विभागों से अधिकारियों को एमसीडी में क्यों भेज रहा है? जब भ्रष्टाचारके आरोप लग रहे हैं, सदन प्रस्ताव पारित कर चुका है, तब भी इन्हें वापस क्यों नहीं भेजा जा रहा? यह साफ संकेत है कि एमसीडी में बाहर से आएअधिकारी बिना किसी निगरानी के लूट मचा रहे हैं। लैंडफिल साइट पर मलबे को कूड़ा बताकर करोड़ों की पेमेंटसौरभ भारद्वाज ने बताया कि भाजपा पार्षदों के मुताबिक, लैंडफिल साइट पर कूड़े की जगह निर्माण का मलबा फेंका जा रहा है। उसे कूड़ा दिखाकरठेकेदार करोड़ों रुपये का बिल पास करवा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह दावा कि हर 15 दिन मंत्री कूड़े के पहाड़ का निरीक्षण करते हैं, भाजपाके ही पार्षदों के खुलासों से सवालों के घेरे में आ गया है। एफआईआर क्यों नहीं? कमिश्नर की चुप्पी संदिग्धस्टैंडिंग कमेटी में पार्षदों ने बार-बार मांग की कि एफआईआर दर्ज की जाए, क्योंकि जांच शुरू होते ही आधा कूड़ा दरअसल निर्माण मलबा निकलेगा।लेकिन कमिश्नर ने आज तक एफआईआर नहीं कराई। इससे साफ है कि ऊपर बैठे अधिकारी और भाजपा नेताओं की मिलीभगत के बिना ऐसा संभवनहीं। क्या एमसीडी में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई होगी?सौरभ भारद्वाज का आरोप है कि भाजपा शासित एमसीडी में कूड़े के नाम पर बड़े स्तर पर लूट चल रही है। पार्षदों के खुलासों के बावजूद कोई कार्रवाईन होना कई सवाल खड़े करता है। अब यह गृह मंत्रालय और भाजपा नेतृत्व पर निर्भर है कि वे भ्रष्टाचार के इस मामले पर कार्रवाई करते हैं या इसेअनदेखा कर देते हैं।
सतारा महिला डॉक्टर आत्महत्या केस, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बनाई SIT, फॉरेंसिक रिपोर्ट में सुसाइड नोट की पुष्टि “दो पुलिस अधिकारी गिरफ्तार”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सतारा में महिला डॉक्टर की कथित आत्महत्या के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल(एसआईटी) गठित की गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि डॉक्टर के हाथ पर लिखा हुआ नोट वास्तव में उसी ने लिखा था। विधानसभा मेंप्रश्नकाल के दौरान फडणवीस ने कहा, नासिक की डॉक्टर की कथित आत्महत्या के मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। फॉरेंसिकरिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि डॉक्टर के हाथ पर लिखा गया सुसाइड नोट उन्हीं का लिखा हुआ है। उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गयामुख्यमंत्री ने बताया कि जांच में अब तक यह सामने आया है कि पुलिस अधिकारी मदाणे ने डॉक्टर को धोखा दिया और उसका यौन शोषण किया, जबकि एक अन्य आरोपी ने भी उसे छल और मानसिक उत्पीड़न का शिकार बनाया। उन्होंने कहा, मौजूदा फॉरेंसिक जांच में मृत्यु का कारण फांसीलगाना पाया गया है। जांच जारी है और जल्द ही आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। एक सेवानिवृत्त जज के माध्यम से स्वतंत्र जांच भी शुरू की गई हैऔर पुलिस स्तर की जांच की निगरानी के लिए एक महिला आईपीएस अधिकारी नियुक्त की गई है। फडणवीस ने इस मुद्दे का कथित तौर परराजनीतिकरण करने वालों की भी निंदा की और कहा, कुछ लोगों ने इस मामले को राजनीति से जोड़ने की दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश की। इस मामले में सभीकी जांच की जाएगी। इस मामले में सतारा पुलिस ने पुलिस उप निरीक्षक गोपाल बदने और प्रशांत बांगर को गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफदुष्कर्म और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उप निरीक्षक बदाणे को इसके बाद निलंबित कर दिया गया। डॉक्टर की बांह पर लिखे नोटउन्होंने यह भी कहा कि शक्ति कानून संविधान द्वारा राज्य को दी गई शक्तियों का उल्लंघन करता है, इसलिए इसे वापस भेजा गया। जिस कानून केआधार पर यह कानून बनाया गया था, उसे भी मंजूरी नहीं मिली। शक्ति कानून में किए गए कुछ नए प्रावधान अब नए तीन कानूनों में शामिल किएगए हैं। जो चीजें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें हटा दिया जाएगा और बाकी शामिल की जाएंगी। गौरतलब है कि 23 अक्तूबर कोसतारा में एक महिला डॉक्टर ने कथित यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर ली थी। डॉक्टर की बांह पर लिखे नोट में एकपुलिस अधिकारी और दो अन्य का नाम था। उन पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप था।
लोकसभा में चुनाव सुधार पर गरमाई बहस मनीष तिवारी बोले, EVM पर भरोसा डगमगाया, चुनाव आयोग सरकार के इशारों पर काम कर रहा

लोकसभा में चुनाव सुधार पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने की। मनीष तिवारी ने कहा कि देश में निष्पक्ष चुनाव कराए जाने समयकी मांग हैं। उन्होंने संविधान के तहत चुनाव आयोग को मिले अधिकारों का जिक्र करके हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार केकार्यकाल में सबसे बड़े चुनावी सुधार हुए। मनीष तिवारी ने कहा, चुनाव आयोग को पूरे राज्यों में एसआईआर नहीं कराए जा सकते। उन्होंने कहा कि1988 में कांग्रेस सरकार ने इतिहास का सबसे बड़ा सुधार कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज चुनाव आयोग केंद्र के निर्देश पर काम कर रहा है।ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हुए तिवारी ने कहा कि इन मशीनों का सोर्स कोड किसी और कंपनी के पास होना चिंताजनक है।कांग्रेस सांसद ने कहा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में जब स्वाधीनता संग्राम लड़ा गया, तो उसके दो बुनियादी लक्ष्य थे। सबसे पहला लक्ष्य थाकि भारत को आजाद करवाया जाए और दूसरा भारत को एक लोकतांत्रिक देश के रूप में परिवर्तित करके लोगों की जो आशाएं हैं, उनके अनुरूप उन्हेंसरकार बनाने का मौका दिया जाए। उन्होंने कहा, जो संविधान के निर्माता थे, उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में उस उर्जा को समर्पित किया, तो संविधान कीप्रस्तावना में उन्होंने दो अहम बातें कहीं। सबसे पहले जो संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान की प्रस्तावना में यह सुनिश्चित किया कि भारत एकसंप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य के तौर पर गठित किया जाएगा और जब संविधान का 42वां संशोधन हुआ तो उस प्रस्तावना में दो और शब्द जोड़ेगए- समाजवाद और पंथनिरपेक्षता। उस स्वरूप में आज 2025 में गणतंत्र है। संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग का गठन कियाभारत के लोकतंत्र में दो सबसे बड़े भागीदार हैं। एक 98 करोड़ आवाम (जनता) जो मतदान करती है और दूसरा भारत के राजनीतिक दल, जो विशेषतौर पर उस चुनाव में हिस्सा लेते हैं। संविधान के निर्माताओं ने यह सुनिश्चित किया कि 1946 से लेकर 1949 तक कि धर्म, जाति, मजहब, फिरकासबसे ऊपर उठकर हर भारत को नागरिक को जो 21 साल की उम्र से ज्यादा है, उसे मतदान का हक दिया जाए। यह उस समय हुआ, जब बहुत सारेऐसे देश थे, जहां पर मतदान का हक एक बहुत ही संकीर्ण तौर दिया जाता था। तिवारी ने आगे कहा, आज मुझे कहने में कोई संकोच नहीं है किपिछले 78 साल में अगर सबसे बड़ा कोई चुनाव सुधार हुआ वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने किया। उन्होंने आगे कहा, उस समय मेंएनएसयूआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष था, उन्होंने हमारी मांग पर करोड़ों- करोड़ों भारत के नौजवानों को मत का अधिकार दिया। जब मतदान की सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई। इससे बड़ा चुनाव सुधार पिछले 78 वर्ष में इस मुल्क और कोई नहीं हुआ। जब संविधान की रचना हो रही थी, यह सारालोकतंत्र का ताना-बना है, इसको चलाने के लिए तटस्थ संस्था भी चाहिए थी और संविधान निर्माताओं ने चुनाव आयोग का गठन किया। उस समयचर्चा चली कि क्या चुनाव आयोग एक स्थायी संस्था होनी चाहिए या अस्थायी संस्था होनी चाहिए। सही जगह जा रहा है कि नहींउन्होंने आगे कहा, देश में एक देश-एक चुनाव पर बहस चल रही है। लेकिन अगर आप संविधान सभा की जो कार्यवाही हैं, उनको संज्ञान में लें तोसंविधान निर्माताओं ने यह देख लिया था कि भारत में दस-बारह साल बाद अलग-अलग समय पर अलग अलग राज्यों में चुनाव होंगे, तो इससे बड़ाप्रश्न खड़ा होता है कि ये एक देश चुनाव का कोई औचित्य बचता है कि नहीं। इसके ऊपर चर्चा करने की जरूरत है, क्योंकि संविधान के जो निर्माताथे, उन्होंने इसे अपने संज्ञान में लेकर उस समय कहा था कि अलग-अलग समय पर चुनाव होते रहेंगे।उन्होंने कहा, यह जो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) है। लोकतंत्र एक भरोसे पर चलता है और वह भरोसा क्या है कि 98 करोड़ लोग जाकरलाइन में खड़े होते हैं, पांच पांच सात-सात घंटे तक धूप में खड़े होते हैं। आप राजस्थान से आते हैं। आप जानते हैं कि कैसी चिलचिलाती गर्मी रहती हैमई जून में। उसको (मतदाता) यह भरोसा होना चाहिए कि वह जो वोट डाल रहा है, वह सही जगह जा रहा है कि नहीं। आज इस देश में बहुत लोगोंको यह चिंता है।